- इंदु बाला सिंह
ईमानदारी की छांव में बसे आत्मा
पर
वो जल जाये ...
उड़ जाये....
बन के गैस ....
बेईमानी की धूप में...
शरीर को आत्मा न होता कोई मतलब ।
ईमानदारी की छांव में बसे आत्मा
पर
वो जल जाये ...
उड़ जाये....
बन के गैस ....
बेईमानी की धूप में...
शरीर को आत्मा न होता कोई मतलब ।
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