लडकियां पार्क में नही खेल
रही हैं
लडको से भरा है पार्क
आरक्षण है कालेज में
लडकियां कम हैं क्लास में
ऑफिस में लडकियां कम हैं
उच्च पद लडकियां सम्हाल
नहीं पाती
बच्चे कौन सम्हालेगा उनके ?
खोलिए चिट्खिनी दरवाजे की
लडकियों का हुजूम निकलेगा
सडकें भरी रहेंगी लडकियों
से
रास्ता भी वे खुद तलाश
लेंगी |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें