मंगलवार, 6 मई 2014

थेथर भाग्य


06 May 2014
12:47

-इंदु बाला सिंह

पूरा घर विरुद्ध हो
और
सधवा घरेलू बहुओं वाला
परिवार हो
तो
उस अकेली चचेरी सास
के मन की
कल्पना करना भी
दुष्कर हो जाता है
वह बुजुर्ग औरत 
जिसके आंगन तो जुड़े हैं
पर
चूल्हा अलग है
जिससे
भरापूरा परिवार
मनचाहा बना खा सके ........
अकेली चचेरी सास
चूल्हा फूंके
अपनी बला से
बर्तन मांजे
हल्दी पीसे
साथ में अपना भाग भी पीसे
पर
नसीब की गाँठ खुले तब न ......
हिस्सेदारिन बहुएं
अपने तरफ के आंगन का कचरा
चचेरी सास के हिस्से में
उड़ा मस्ती लें ........
ठिठोली करें ......
बड़ी बेटीवाली है
जा कर रहती नहीं बेटी के पास
अफसर बेटी है इसकी .....
हम भी
जरा मजा लें उस अफसर बेटी का
आ कर रहती नहीं यहां 
अपने घर में .........
फिर
एक जोर की
दुसरे हिस्से सी आती
राक्षसी हंसी
डरावनी लगने लगती थी उसे
कभी कभी उसे लगता था
कि
उसका नसीब भी थेथर हो गया है
आयु के साथ साथ
देखता रहता है
अपने सम्बन्धियों को
पति गर्व में फूली
तीज त्यौहार में सजी धजी
चहकती औरतों  को |






रविवार, 4 मई 2014

नसीहत


05 May 2014
09:40

-इंदु बाला सिंह

न सोहेगी नसीहत
विपरीत विचारधारावाले को
खो दोगे तुम अपना सम्बन्ध
भले ही
वह
अपना जाया ही क्यों न हो
समय से सबल
नैतिक शिक्षक न कोय |

छोटे परिवार का उपहार


03 May 2014
10:52
  -इंदु बाला सिंह

मीठी बात करने वाले के पास
कभी कभी
जब हम पहुँचते हैं
तो
एक दिन
उनका व्यक्तिव
प्याज सरीखा पाते हैं हम
हर परत वे
झूठ और अहं से चूर रहते हैं
हर पल चौकन्ने न रहें हम
तो
अपने पास पहुंचे व्यक्ति को
जोंक सा चूस फेंक देते हैं वे सफेदपोश .....
क्या पता जीवन की किस पाठशाला में
गढ़ा था उनका चरित्र ..........
ये कैसा व्यक्तित्व है ?
जितना
हम सोंचते हैं
उस विचित्र जीव के बारे में
उतना ही मशीन बनते जाते है
दया करुणा खोते जाते हैं .......
यह हमारे छोटे परिवार का अद्भुत उपहार है
सुख सुविधा से
जितने भरपूर हैं हम
उतने ही
भाव शून्य अकेले है हम |

शुक्रवार, 2 मई 2014

पढ़ी लिखी लड़की


30 April 2014
06:30
-इंदु बाला सिंह

उसने एक डाक्टर की
दो सगी इंजीनियर बेटियों को
अपने घर में
ला लिया था
एक का ब्याह उसने
अपने बेटे से कर दिया था
और
दुसरे का ब्याह
अपनी बेटी के बेटे से कर दिया था .....
आज कल
उनकी छोटी जाति में
अच्छे खानदान की पढी लिखी लडकी
मिलना मुश्किल था |

बाल भोर


30 April 2014
07:18
   -इंदु बाला सिंह


सुबह सुबह साढ़े पांच बजे
प्यारा सा
गोल मटोल
लगभग छ: वर्षीय बच्चा
एक दुबले पतले आदमी से कुछ दूर
चल रहा था
मैदान में ट्रैक पर
और दूरी बढ़ जाने से
दौड़ रहा था
उसके साथवाला
दुबला आदमी
बच्चे का पिता लग ही न रहा था ........
मैदान का गेट आते ही
बच्चा रुक गया
अब उस बच्चे को घर जाना था
पर
पापा आगे बढ़ते गये
बीस मीटर की दूरी बन गयी दोनों के बीच .....
पापा s s s .....
जोर की आवाज आयी बच्चे की
आ जाओ s s s .......
मुड़ कर चिल्लाये पापा
रुको पापा s s s ....
बच्चा चिल्लाया और दौड़ा
नहीं रुकेंगे ...
अब पापा जी दौड़ने लगे
दूरी बढ़ने लगी फिर दोनों के बीच की
चाभी नहीं दूंगा .....
बच्चा रूका
और
हाथ की चाभी दिखा कर धमकाया
पापा से उत्तर न पाने पर
फिर दौड़ने लगा वह
पापा तक पहुंचने के लिए
पापा s s s .....
फिर आवाज गूंजी
बच्चे की
गेट तक पहुंच कर रुक गये पापा जी
थोड़ी देर बाद
पापा बेटा सड़क पर थे
आकाश केवल रंग बिखेर रहा था |






झाड़ूदार


30 April 2014
20:28
    -इंदु बाला सिंह

अपने घर के
अंदर बाहर नाली बाथरूम
साफ करने में
अगर पुरुष को
शर्म आये
कहीं वह झाड़ूदार न कहलाया जाने लगे
तो
सड़क पर झाड़ू पकड़ कर दिखावा क्यों ?
यह
हर महिला का अपमान है
क्यों कि
अब तक महिला ही झाड़ूदार कहलाती थी |

बेटी की नियति


02 May 2014
05:49
    -इंदु बाला सिंह

गुपचुप मन्त्रणा कर रहे थे
पर चलते समय
निकल गयी आवेश में
पिता की आवाज
कुंडली हाथ में पकड़े थे
पर
इस बार बला की ताकत आ गयी थी
बेटी में
हाथ से कुंडली खींच
कड़क कर बोली .......
एक बार ब्याह कर मेरा
जीवन बर्बाद किया है आपलोगों नें .......
घर से बाहर करने का खूबसूरत बहाना था
क्यों कि सदा कहते रहे आपलोग
बेटी को कौन देता है हिस्सा .......
अब नहीं करने दूंगी
आपलोगों को अपने मन की
आप के पसंदीदा युवक से
मैं ब्याह न करूंगी .......
इस वाकयुद्ध नें नींद तोड़ दी उसकी
उसने देखा
अभी तो पौ फटी नहीं है
माता पिता और भाई भाभी अपने अपने कमरे में हैं
एकाएक 
भाई की दो माह की बिटिया
रो दी |