रविवार, 17 फ़रवरी 2013

दीमक बना मन


आश्चर्य में हूँ
आधी आबादी जी रही है
पैतृक संपत्ति विहीन
पुरुष को तृप्त करती हुयी
उसकी सेवा करती हुयी
झूठी शान और इज्जत के झंडे तले
घुटन को त्याग का नाम दे
सदा आर्थिक सुरक्षा तलाशती रहती है
किसी न किसी पुरुष रिश्ते से |
ये कैसी समानता है बेटे बेटी के कानूनी अधिकारों की ?
ये कैसी प्रगति है समाज की आज !
बेटी माता पिता को स्वेच्छा से त्याग देती है
अपना घर बसाने को ?
बेटी से मात्र कर्तव्य की आशा है !
घरों को फेविकोल के जोड़ की तरह जोड़ने की आकांक्षा है !
ये कैसी विचारधारा है हमारी ?
आज भौतिक सुख सुविधाएँ बढ़ रही हैं
हमारा " मैं "
दीमक बन खा रहा  है
हमारे अंतर्मन की इमानदारी को |

क्रूर मौसम

अँधेरे में
मनदीप के सहारे
चलता अस्तित्व एकाएक ठिठक गया
आशंका सही निकली
जोर की आंधी पानी के साथ आयी
दीपक को बुझने से बचाती चेतना बौखलाती रही
ओले पड़ते रहे
साँस हर पल रुकती सी लगी
आखिर थक गया मौसम
वह बौखलाई सी
देखने लगी
समेटने लगी अपने टूटे ख्वाबों को |

रविवार, 23 दिसंबर 2012

खुशबू




स्वतंत्रता की नींव
आत्मसंयम है
मन का बुद्धि पर हावी होना
पतन का मार्ग है
इस विचारधारा में पले
हम भारतीय
भौंचक्क रह जाते है
विदेश से लौटे भारतीय मूल की जीवन शैली देख |
अपने धन और आजादी का
इतना दुरुपयोग !
मन दुखी होता है
पर वह भारतीय
जो इन्हें
प्रशंसा भरी नज़रों से देखने लगता है
धीरे धीर
खो देता है
अपनी खुशबू |

सोमवार, 17 दिसंबर 2012

अपमानित पेड़




कल
तुमने मेरी
फल लगनेवाली
मोटी मोटी टहनियों को काट कर
फेंक दिया था
आज
तुम उसी टूटे अंग पर
कपड़ा सुखा दिए अपना ?
मित्र आंधी
स्वार्थी निकल गयी
नहीं तो
उसके सहारे
तुम्हारा कपड़ा
फेंक देता
मैं |

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

रक्त संबंधी


आसमानी !
मैं तेरी रक्त संबंधी
तू मुझे
नभ के स्वप्निल घर में सैर करा
मैं तुझे
जमीनी कंद मूल खिलाऊँगी
यूँ ही
कट जाएगा
हमारा जीवन
एक दूसरे के साथ |

साथी


उसने
फल लगे वृक्ष को
आरी से काट दिया |
...इसे बाहर फेंक दो |
...फल लगा था सर पेड़ में |
वह डर गया
ऐसा करो
इसको यहीं पड़ा रहने दो
फल फूलदार होनहार वृक्ष
वहीं पड़ा
मुरझाने लगा
पास का फूलों से लदा वृक्ष
कसमसा उठा
अपने साथी की दुर्दशा देख
शायद
कल उसके साथ भी ऐसा ही हो !

शनिवार, 8 दिसंबर 2012

गरूर

सूपर्नखा !
तेरी नाक कटी होती
अगर तेरी एक अलग पहचान होती
रावण की बहन बन
घूमती थी
तू स्वछन्द
वन में
यह गरूर
तेरा मान
ले डूबा |