बुधवार, 11 अप्रैल 2012

कैसे लोग ?


वह डायन थी
मार दी गयी |
जिसको देखती थी
उसका बिगड़ जाता था काम |
बच्चे पर पड़े निगाह
तो मर ही जाते थे वे |
ये ही वे लोग हैं
जो भगाते गरीब बहू |
पा जाते वे नयी नवेली
सुन्दर दुल्हन सामान के साथ |
और भी तरीके हैं
उनके पास काम निकालने के |
रख लेंगे घर -दामाद वे 
बहू का विवाह करने के बाद |
कहाँ है कानून ?
जब सामने आएगा तो देखा जाएगा |

सजीव उपन्यास


हर एक व्यक्ति 
सुन्दर सजीव उपन्यास है
जिसमें आलोचक भरते हैं रंग |

बहादुर


समय ने
उसे बहादुर बना दिया |
भूकंप के झूले में
मजा आने लगा उसे |
अब वह इंतज़ार करने लगा
खूबसूरत मौत का |
उसकी दिलेरी देख
मौत ने रुख बदल लिया |
वह मन ही मन मुस्करा उठा
मौत को डरते देख |

सुनामी


खूबसूरती
की इतनी उफान
नाश हुए हम तो  |

बेटा ही चाहिए |


कितनी
सड़ी - गली है सोंच
जो सोंचते हैं
बेटा जरूरी है
जबकि दोनों ही
चले जाते हैं
दूर अपने परिवार के साथ
कमाने खाने
छोड़ माँ बाप को
अकेले |

मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

अप्रत्याशित बारिश


इस तपते मौसम में
हल्की आंधी के साथ आती
बारिश की बूंदों नें
तन शीतल किया
और मिट्टी की सोंधी महक से
मन पिघलने लगा |
जल्दी जाय
यह अप्रत्याशित आगमन
बारिश का
और गडगडाहट बादलों की
नहीं तो सब पिघल जायेगी 
इतने प्यार से संजोयी निस्पृहता |
कामनारहित हो संसार में
दूसरे के दुख में दुखी
और सुख में सुखी
दूसरों को पहचानने में लगा मन
दिन में ही
लगेगा भटकने |

सोमवार, 9 अप्रैल 2012

एक समस्या


शर्म से झुक गया  है सिर
पढ़ कर खबर
शिक्षक छठी कक्षा की छात्रा को ले कर
हो गया फरार |
अभी कल ही पढ़ी
एक स्थानीय अखबार में
विचार आया मन में
आखिर क्यों ऐसा होता ?
लड़कियां लड़कों के मुकाबले
क्यों जल्दी जाती हैं फुसल
कितना डर लगता है
भेजने में बच्ची को विद्यालय |
कैसे पढाएं और पालें
लड़की को
गाँव और कस्बों की है
समस्या यह |