सोमवार, 13 अगस्त 2018

आखिरी दांव

-इंदु बाला सिंह

आखिरी दांव भी क्या भावना है !

आदमी इस पार या उस पार हो जाता है

बस तख्ता पलट जाता है

बांझ क्या जाने पीर जनने की ।

बुधवार, 8 अगस्त 2018

चोटी की छांव

-इंदु बाला सिंह

चोटी की भी छांव होती है
सुस्ताते हैं इसमें अपने ....
छांव देख पाने की आंखें होनी बड़ी  जरूरी हैं ।

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

देववाणी

-इंदु बाला सिंह


बेटी ने कहा ....
तुमने पैदा कर के अहसान नहीं किया

बेटे ने समझाया ....
मेरी भी इच्छाएं  हैं जीवन में ...आखिर मेरा भी भविष्य  है


भौंचक मां सोंच रही है ...
मेरी किस्मत में कैसे अपने जोड़े दैव ने

आकाश खामोश है

देववाणी फिल्मों में होती है ।

रविवार, 1 जुलाई 2018

तू है कि मानती नहीं



Tuesday, June 19, 2018
7:34 AM


-इंदु बाला सिंह


झूठ से  इतनी नफरत !

इतनी जिद ...

यार !

थोड़ा बहुत झूठ तो चलता है

क्यों चिढ़ती हो तुम .....

सच में झूठ थोड़ा झूठ मिलाने से चटपटी हो जाती है जिदगी

एक ठहाका भगा देता है दुःख को दूर ............

पर तू है कि मानती नहीं

सच की तपिश में झुलसती रहती है ]

शुक्रवार, 22 जून 2018

एक मरु - उद्यान

-इंदु बाला सिंह


हर पल जीना

अथक श्रम करना

हिम्मत न हारना

सुख की नींद लेना

कि

ओ युवा !

तेरी भुजाओं में ....तूफ़ान है ... तेरा ईमान है

लिंगभेद से परे ... तू इंसान है .... तू महान है

तुझमें प्रकृति ने अपना अंश दिया है ....

तू

पहाड़ सा कठोर है

वर्षा जल सा निर्मल है

अरे !

तू तो एक मरु - उद्यान है

अपनी मां का जहान है  |

गुहार है

-इंदु बाला सिंह



मोह भंग हुआ ....आस  न टूटी

कर्तव्य डोर कस के जो बंधी  थी

बड़ी कठिन डगर थी ....

ओ असीम शक्तिमान !

शक्ति के अहसास की आस है

मन में शक्ति देना |


बोलने दो

-इंदु बाला सिंह


चुप्पी बहुत शोर करती है

बोलने दो उसे ....

तुम अनसुना कर देना

आखिर थक ही जायेगा वह ....

तुम मन में कोई खुशनुमा गीत

बस गुनगुनाते रहना ......

बोलने दो उसे .....

मौन एक आत्मघाती बम है

फटेगा तो तुम्हें भी लील लेगा ....

तुम सतरंगी गीत गाते रहो न |