रविवार, 11 जून 2017

आखिर क्यों



- इंदु बाला सिंह
टूटते सितारे से लोग मांगते है ....अपनी चाहत 
मैं .... उस सितारे के टूटने से दुखी होती हूं
गुजरते मुर्दे को लोग नमस्कार करते हैं
पर ....मुझे उस निर्जीव का दुखी परिवार याद आता है
आखिर क्यों ।

बुधवार, 3 मई 2017

सजीव हो उठती है सड़क



- इंदु बाला सिंह

गर्मी की सुबह पार्क के ट्रैक पर चलते चलते न जाने कैसे मैं सड़क पर पहुंच जाती हूं
और नन्हे तुम मेरे बगल में चलने लगते हो ......
तुम्हारी आँखों  में उत्सुकता तैरने लगती है
सड़क सजीव हो उठती है  ।

शुक्रवार, 24 मार्च 2017

सोना कम कर दिया है मैंने


Monday, March 20, 2017
12:08 PM
- इंदु बाला सिंह

ऊंचे ऊंचे सपनों से घबरा कर सोने की अवधि कम कर दी है मैंने ......
अब छोटे छोटे सपने आते हैं
ये छोटे सपने पूरा न हो तो छोटा दुःख देते हैं
 स्वप्निल आँखों में सदा छोटे छोटे सपने बनते मिटते रहते हैं |

अजब आशीर्वाद


7:17 AM

-इंदु बाला सिंह

जब जब ब्याहता झुकी
सादर चरण स्पर्श किया ..... अपनी सासू माँ का उसने ....
उसे आशीर्वाद मिला ... सदा सुहागन रहो
हर जगह था बेटा
और वह लड़की गुम गयी थी ससुराल में ....
यह कैसी सुरक्षा थी ?
यह कैसा सुख था |

गर्मी


- इंदु बाला सिंह

गर्मी चढ़ने से 
दुनिया मुट्ठी में लगती है
मन में बादशाहत छा जाती है
पैर जमीं पर नहीं रहते ... मुंह से विष बुझे तीर छूटते हैं
अपनी ऐसी अजूबी कृति को देख ...ईश्वर भी हैरत में पड़ जाता है ।

भूख


- इंदु बाला सिंह


अपने बच्चे को खिलाते खिलाते उसने भी दो कौर मुंह में डाल लिया 
अब सबके अंत में खाना मिले तो क्या दुःख ......
और
तरसती रही .... भूखी रही जेठानी ... उसका ब्याह हुये दस बरस बीत चुके थे ..... वह अब तक निःसंतान थी ।

बेटा


- इंदु बाला सिंह


बेटा बड़ा हुआ ......पत्नी का हुआ 
बेटी बड़ी हुयी .........पति की हुयी
जन्मदाता अब जी रहे हैं अपने तरीके से
अरे ! ... ..... हमारा बेटा खूब याद रखेगा हमें
इस दुनिया से जाने के बाद हम अपना सब कुछ उसे ही तो दे जायेंगे ।