बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

हाइकू - 46


 मन

मन तितली
पहचान न खोये 
उड़ती रहे |

मन तो खोजी 
खोजता फिरे सदा 
खोयी कहानी |

मन तो हल्का
गुब्बारा है गैस का
उन्मुक्त उड़े |


मन मुस्काए 
सपने देखे बसे
नए ग्रह में |

हाइकू - 45


पशु  हो रहे
हम धीरे धीरे रे
ये क्या हो रहा ?


शिक्षक मन
पढाना चाहे पाठ
जो पास आये |

मन में राम
क्यूँ  घट घट ढूंढें
मूरख प्राणी |


इतरा तू
रूप चार दिन का
गुण रहेगा |

हाइकू - 44


मुबारक हो !
जन्मदिन तुमको
' गूगल ' प्यारे !


ज्ञान कलश
छलकाया घर में
है गूगल ने |


अजब लगे
गजब का तिलिस्म
जग ये सारा |


कहाँ पे ढूंढे
शहीद की संतान
पिता का प्यार |

छोटी कवितायेँ - 13



  इच्छा 

बावरा मन
बहुत कुछ बनना चाहे
कभी कभी
कोई अधिकारी तो कभी कोई
और बन भी जाये वो
जी भी ले वो जीवन
मित्रों ,रिश्तों के माध्यम से |


       चाहत 

 छोटी सी चाहत रही
सदा हमारी
सुबह की भागम दौड़ में
गलतियाँ हो कभी
जीवन में
जिन पर करना पड़े अफ़सोस
जीवन संध्या में |



     दिया जले   !

उनकी उम्मीद का दिया
जलाए रखना
सदा तू
जब भी थकें अपने
बैठें
तेरी रोशनी में
सुस्ताने |

छोटी कवितायेँ - 12



   मौन 

मौन  ने
जिन सम्बन्धों को 
ठन्डे बस्ते में डाला
कालांतर में
जीवाश्म निकले |


  दुष्टा 

पुरुष करता है
शिकार स्त्री का
छल बल कौशल से |
दुष्टा स्त्री करती है
शिकार स्त्री का
पुरुष के सहारे |



  साहित्य 


साहित्य हूँ मैं
तुम मुझमें पाओगे
अनकहे सत्य
काल  के
इतिहास सा 
मात्र वर्ष और घटनाक्रम का
भंडार नहीं मैं |

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

छोटी कवितायेँ - 11



    रूप


रूप निखारेंगे
कितना भी
आप
श्रम की चमक
न आयेगी नजर
मुस्करा कर देखेंगे
आइने में आप
जब भी
आखों का फीकापन
आयेगा नजर |

  प्रेम 

प्रेम कीजिये
आज
कर्म से आप
मुस्कराईये
तो जरा
देखिये
कितने ख़ूबसूरत हैं
आप |

हाइकू - 43


हम न छोटे
आशा के गुब्बारे लें
नभ में उड़ें |

जीवन - खेल !
कबड्डी का है प्यारे !
मार के जीतो |

हम खेलेंगे
अवरोध फांदेंगे
नभ चूमेंगे |

हम जीतेंगे !
हतभागी नहीं तू !
मुस्करा दे माँ |