पुरुष
का हर रूप स्वार्थी ।
स्त्री
का हर रूप है सुविधा भोगी ।
अपने को सही साबित
करने के है बहाने सकड़ों ।
दोनों में कंधे से कंधा भिड़ा दौड़ने की
इच्छाशक्ति ही नहीं ।
कैसे हो उत्थान ?
खाली आरक्षण चाहिए
किसी न किसी रूप में ,हर किसी को ।
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