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गुरुवार, 15 सितंबर 2016
उठाई है मैंने कलम
- इंदु बाला सिंह
काट मेरे मन के कोमलतम तार
तू चाहे मैं उठा लूं आग
पर
शांतिप्रिय मन मेरा
होने न देगा पूरी तेरी आकांक्षा ........
कि
उठाई है मैंने कलम
और
उंडेल दी है उसमें पूरे मन की श्याही ।
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