Thursday,
15 September 2016
11:13 AM
-इन्दु
बाला सिंह
झूठ
के पाँव लम्बे होते हैं
वह
लम्बे लम्बे डग ले कर अपने पास के और
दूरस्थ इंसान को लपेट लेता है
झूठ
का सम्मोहन इतना निराला कि जब तक हम चेतें वह नया जाल बिछा लेता है
इसकी की गिरफ्त से निकलना उतना ही दुरूह है जितना
ज़मीन पर रेंगते सांपों से बच के निकलना
सच अपनी चाबुक पकड़े न्यायालय
में कुत्ते की नींद सोता है …… अपनी
पुकार का इंतजार करता रहता है ।
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