सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

आत्म - सुख की चाह !


०१.०९.९७ .



आत्म -सुख की तलाश में
पल पल खंडित होता है अस्तित्व |
अमराई की छाँव में
स्व को टटोलने लगता है मन |
तोड़ समय के ऊँचे पहाड़ों को
निर्बाध बहना चाहता है |



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