लड़कियां
घर की शान होती हैं
पहचान होती हैं
जान होती हैं |
उनके बिना
घर रेगिस्तान होता है
शमशान होता है |
वे
घर की आत्मा होती हैं
रंगों की फुहार होती हैं
भोर की मधुर तान होती हैं |
लड़के
समाज का जवाब होते हैं
माँ का उल्लास होते हैं
पिता की निश्चिन्तिता होते हैं |
उनके बिना
पिता समाज में थके हारे होते हैं
चिंतामग्न रहते हैं
ठन्डे रहते हैं |
वे
समाज का जवाब होते हैं
खिलखिलाहट होते हैं |
आकांक्षा होते हैं
दोनों
घर की आवश्यकता हैं
परिपूर्णता हैं
मुग्धता हैं |
समाज
घर से है
उससे क्या मांगें
क्यूँ मागें |
घर
का गणित
हम खुद ही
क्यूँ न हल करें |
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