बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

मस्त रहिये !


  

  

खाइए सोईये
मस्त रहिये जनाब !
अंगडाई लीजिए
चाय पीजिए जहाँपनाह !
पड़ोसी हैं हम
हमारी क्या बिसात !
शान हैं आप
हमारे समाज की |
आपकी चर्चा
शान है नुक्कड़ की |
आपसे हैं हम
हमसे है दुनिया !
आप खुश रहिये
हमें भी मौका दीजिए !

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