शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

खम्बा



खम्बा बन कर तनी थी
वो
और
उसके सहारे
तम्बू तना था
नीचे घर बसा था
खम्बा गिरा
तम्बू
उड़ा
रहने वाले बंदे
चले
अपना घोंसला बनाने |

मोह




अपना जो था ही नहीं
उसका
मोह कैसा !
जब तक बसे थे
साथ था
अब चलूँ
मैं
निज देश |

स्वर्ग




तेरी ऊँचाई
देख ली
सार सार गह लिया
मैंने |
मैं
कथित गरीब
खुश हूँ 
अपने जहां में |
मुबारक है !
तुझे
तेरा
प्रिय स्वर्ग |

टीचर




दीदी  !
कल हमारी छुट्टी
हमारे स्कूल की इंग्लिश टीचर मर गई
बहुत अच्छी टीचर थी ....
हाँ हमारे समय भी पढ़ाती थी वो ....
अच्छा हुआ छुट्टी मिली तुमलोगों को ...
नईईई !
बहुत अच्छी टीचर थी वो
दीदी !
अब हमलोगों को कौन पढायेगा ?....
कोई दूसरा पढ़ाने आयेगा
किसी के बिना दुनिया नहीं रुकती है .....
नहीं दीदी !
वो तो नहीं मिलेगी हमें .....
विद्यालय में काम करते वक्त
कोई जब भगवान को प्यारा होता है
तब खबर आग की तरह
सभी बच्चों में
फैलती है
पूरा शहर जान जाता है
बच्चों की दुनियां पल भर को ठहर जाती है |

रविवार, 25 नवंबर 2012

शहीद की माँ


मेरा बेटा
देश हित मिटा
नाज है
मुझे उसपे
पर
दिल का एक कोना खाली है
जहां मेरी रूह तडपती है उसके लिये
माँ हूँ
पत्थर नहीं
हर वर्ष
जब तुम सब श्रद्धा सुमन अर्पित करते हो उसे
मेरा कोना विह्वल कर देता है मुझे
क्यों तुम सब याद करते हो उसे ?
मैं तो उसे भूलना चाहती हूँ
अन्यथा
पल काटना मुश्किल हो जाता है |

कौशल


लड़कियों !
विद्रोह करने का नुस्खा
अपनाईये
सबेरे सो कर उठिए दस बजे
दैनिक कार्य
निपटने के बाद
अपने नाश्ते की चिंता कीजिये
दूसरों की चिंता करेंगी !
मिट जायेंगी
आप |
डर किस बात का
कोई क्या कर लेगा आपका 
आप भविष्य हैं
उनका
वे नाखुश होते हुए भी
मुंह से मीठी मुस्कान
मीठी जुबान भी निकलेंगे
फिर
आपके पास मातृत्व है
अपने कौशल भंजायिये
और
मस्त रहिये |

बुधवार, 21 नवंबर 2012

गाँठ


बचपन
कैसा अबोध होता है
माँ से लड़नेवाला बुरा होता है
और गाँठ पड़ जाती है
मन में
वो भी एक ऐसी गाँठ
जिसे हम कभी नहीं खोल पाते हैं |
उम्र के साथ
समझ बढ़ने पर
उस घटना को हम
जब पुन: महसूसते हैं
तो पाते हैं
एक नयी दृष्टि
पर वह बंधी गाँठ
हमसे नहीं खुल पाती है
शायद
हममें मनोबल का अभाव रहता हो
इस समय काल और दूरी भी
अपनी
मुख्य भूमिका अदा करने लगते हैं
गांठ के न खुलने में |