बाइस साल जेल में बिताने के बाद
जेल ने कैदी को निर्दोष साबित किया
क्या भाग्य को दोष दूं
या
ईश्वर को
घर लौटा तो निकटस्थ मर गये थे गरीबी की मार में
छोटा सा मकान मिट्टी में मिल गया था
अब कैदी परिस्थितियों का कैदी था
भीख पर गुजारा कर रहा था ।
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
बाइस साल जेल में बिताने के बाद
जेल ने कैदी को निर्दोष साबित किया
क्या भाग्य को दोष दूं
या
ईश्वर को
घर लौटा तो निकटस्थ मर गये थे गरीबी की मार में
छोटा सा मकान मिट्टी में मिल गया था
अब कैदी परिस्थितियों का कैदी था
भीख पर गुजारा कर रहा था ।
कम आमदनी थी
ऑफिस जाने का भाड़ा के लिए
वह अपनी माँ के भगवान के सामने रखे सिक्के चुरा लेती थी
भगवान जी !
मैं अगले महीने तनख्वाह मिलने पर लौटा दूंगी
और
वह हर महीने भगवान की मूर्ति के सामने वापस रख भी देती थी
हर महीने कोई नई जरूरतें पैदा हो जातीं थीं
और
उसे भगवान के सामने रखे पैसे उठाना पड़ता था ।
वह प्राइवेट सि्कयुरिटी गार्ड था
उसने शान से कहा था
हम ऊंची जाति के हैं
ये लोग अंबेडकर वाले हैं
आखिर कैसे यह विचार पनपा उस शहरी गार्ड के मन में
सोचनीय मुद्दा है ।
मन के अंधियारे में लगा
एक सुख का पौधा
सूखे ना
सदा रहे हरियाया
दुख के बादल में
ग़म के कुहासे में
न फले और न ही फूले
प्राणवायु बने
नैनों में चमके ।