बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

सुबह की आशा


Monday, January 30, 2017
4:19 AM
बह रहा है समय
मौन मुखरित न हो रहा
 यूँ लग रहा घरों में आत्मायें डोल रहीं हों
एक एक पल भारी होने लग रहा है सूरज के इन्तजार में |

ब्याहता के पुराने दिन


06 January 2017
10:11
मुझे ऐसी बहू चाहिये ....
जो घर का काम करे .....
सास ससुर का ख्याल रखे .....
ननदों को अपना समझे ...
और मुझे उस ब्याहता के पुराने दिन याद आ गये |

आदर्श बनना चाहते रहे हम


- इंदु बाला सिंह

गिर गिर के चले हम 
आंधियो से सहमते रहे हम
न जाने किस आस में जीते रहे हम
आखिर क्यों और न जाने किसका आदर्श बनना चाहते रहे हम ।

पर्दा सी रहे हैं हम


- इंदु बाला सिंह
हम तो तब भी कसक रहे थे .... अब भी कसक रहे हैं 
मर्यादा ढो रहे हैं
किवाड़ के फटे पर्दे सी रहे हैं
वरना हम भी आदमी थे काम के ।

लड़की घोड़े पर सवार नहीं हुयी


Wednesday, February 15, 2017
7:45 PM


राजकुमार घोड़े पे आयेगा ....
राजमहल ले जायेगा .....
कहानियां सुन बड़ी हुयी ....लड़की
न जान पायी .....
जुझारुपन |
उसने .... बनाया  एक सूरज....नामकरण किया उसका ...किस्मत
और
वह सदा बातें करने लगी

अपनी  किस्मत से |

रविवार, 22 जनवरी 2017

मजदूर


23 January 2017
12:55




कंधे पे फावड़ा
और उंगली पकड़े चलता तीन या चार वर्षीय बालक
मुहल्ले में नया चेहरा दिखा ...
रईसों के गमला संस्कृति वाले मुहल्ले में अपना भविष्य तलाशता मिट्टी खोदनेवाला
छ: महीने में ही वह कंधे बड़ा सा बोरा ढोए दिखने लगा

एक मजदूर कचड़ा बीननेवाला बन गया था |

मंगलवार, 3 जनवरी 2017

अच्छी भली हूं


03 January 2017
22:12
-इंदु बाला सिंह

मैं तो अच्छी भली हूं अपने अभावों संग
ओ री खुशी !

तेरे लिये मेरे दिल में जगह नहीं है |