बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

सुबह की आशा


Monday, January 30, 2017
4:19 AM
बह रहा है समय
मौन मुखरित न हो रहा
 यूँ लग रहा घरों में आत्मायें डोल रहीं हों
एक एक पल भारी होने लग रहा है सूरज के इन्तजार में |

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