शुक्रवार, 1 अगस्त 2014

छात्रों से सीखें


31 July 2014
12:21
-इंदु बाला सिंह

स्कूल के
प्रथम से ले के बारहवीं कक्षा के छात्रों से
सीखें हम
अनुशासन का पहला पाठ
दूर से दिखते ही बस
पंक्तिबद्ध हो जाना
और
एक एक कर के बस पे चढ़ना |

बूढ़े को डांट


31 July 2014
13:13
-इंदु बाला सिंह

माना बच्चा बूढ़ा एक समान
बच्चे को डाँटते हैं हम
उसे सुधारने के लिये
पर
बूढ़ों को क्यों डांटते हैं हम |

मुंह मोडूं


31 July 2014
23:09
-इंदु बाला सिंह

कैसे होते होंगे
वे माँ बाप
अपने बेटे बेटी के कष्टों को सुन
मौन रह जाते होंगे यह सोंच ........
समय सब ठीक कर देगा
समझौता हो जायेगा
समझदार हो जायेगा
हम भी तो झेले हैं कष्ट |
पर
जब खो देते हैं अपनी औलादें वे
तब
उन्हें रोते
पछताते देख
भला क्यूँ न
उनसे सदा के लिये
मैं मुंह मोडूं  |

आंख का पानी


01 August 2014
08:23
-इंदु बाला सिंह

सुख दुःख का साथी है
पानी .......
यह आखों में
धीरे से आता है
और
फिर आंखों में ही समा  जाता है |

मेरा डंडा


01 August 2014
10:06
-इंदु बाला सिंह

मेरा डंडा
मुझे है प्यारा
पेड़ से मैं इससे तोडूं अमरुद
मेरे बचपन का यह घोड़ा
इसपर बैठ 
मैं हर रोज बनती थी सैनिक
पहुंचती थी हल्दीघाटी के मैदान में
अपने इस प्यारे डंडे से
मैं मारूं
घर में निकले सांप
डंडे से तो भूत भी भागे
इसी लिये तो
सम्हाल के रखूं मैं अपना डंडा |

सफल शिक्षक


01 August 2014
13:41
-इंदु बाला सिंह

हर सफल शिक्षक के
मन में
एक जिज्ञासु बच्चा बैठा रहता है
जो
छात्र से सीखता है
और
उसे सिखाता भी है
पर
उसे मार कर नहीं
दलीलों द्वारा
उसका मन जीत कर |

समझदार मन


01 August 2014
21:28
-इंदु बाला सिंह

मन को उड़ते देख
उसका पर काटे बुद्धि
यह स्वार्थ है
या समझौता बुद्धि का
समझ न पाने पर
व्याकुल मन
बौखला कर फुदके
इस कमरे से उस कमरे
छत और बालकनी पे
ज्यों ज्यों रात बीते
त्यों  त्यों शीतल हो तन
और
सो जाये मन
गजब का समझदार है मन
कभी न उड़ बैठे पेड़ पे
उसने देखा है
हर रात को आती है
एक बिल्ली
जो
पकड़ के ले जाती है एक पक्षी |