सोमवार, 6 जनवरी 2014

मफलर और फुट पाथ

हाय रे !
मफलर अब न मिले
फूट पाथ पे  
मैं कहाँ से खरीदूं इसे
बड़ी जोर की ठंड है
बड़ी दुकान में जाने की हिम्मत नहीं
ठंड आंख दिखाए
कैसे अब  खाना बनाऊँ
रजाई मन भावे
कैसे आफिस जाऊं
राह में कोहरा
राह रोके
चहुँ ओर कोहरा ही कोहरा
मन में भी
कोहरा ही कोहरा
कोई तो बेचो
मफलर फुट पाथ पे |

जीत ले औलाद का दिल

दिल  न जीत पाए तुम
अपनी औलाद का
तो
क्या जीतोगे तुम
अब भला
सामने की समस्यांए
ये नन्हे
उनकी सपनों भरी ऑंखें
हमारे भावी देश का
स्वरूप हैं |

छात्र की आकांक्षा

सुना है
तेरी बस्ती में
रतजगा रहता है
ज्ञान बंटता है
पहुचुंगा
हो समय पर सवार
मैं भी एक दिन
डुबकी लगाऊंगा मैं भी
उस ज्ञान गंगा में तैरने की
तमन्ना पूरी करूंगा
दृढ है विश्वास
अभी तो साध रहा हूं मैं
अपना निशाना
ओ मेरे विश्व विद्यालय !

बुधवार, 1 जनवरी 2014

जीत ले औलाद का दिल

दिल  न जीत पाए तुम
अपनी औलाद का
तो
क्या जीतोगे तुम
अब भला
सामने की समस्यांए
ये नन्हे
उनकी सपनों भरी ऑंखें
हमारे भावी देश का
स्वरूप हैं |

सोने चली संध्या

खोल पिटारा
लो साल के पहले दिन ही
संध्या ने लुटाया
सुनहली किरने
और
सोने चली
मुख पर डाल काली शाल |



उत्सुक है आज मन

दो हजार तेरह
तुमने जाते जाते बदल दी सत्ता
और मजबूर कर दिया हमें
सुनने को आहट
आने वाले परिवर्तन  की
यह लो !
अब उत्सुक हो गया है मन
और इंतजार कर रहा है
नव वर्ष के
आगमन का
हर मकान में जल रहा है
आशा दीप
देखो पल रहा है
हर घर में एक सपना 
जो चाहे सच होने को |

धूल ही धूल है

जल्दी हाथ चलाओ
ओ झाड़ूदार !
धीरे हाथ चलाओगे !
अरे देखो !
जितना तुम सामने साफ कर रहे हो
तुम्हारे पीछे उतनी ही गर्द
जमती जा रही है
चारों ओर हवा में धूल ही धूल है |