गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

भाग्य भरोसे



मन में


मौसम की तरह आते हैं  विचार


वे हमे गढ़ते हैं 


कभी कभी वे वास्पीभूत हो जाते हैं


जीवन की बगिया से खर पतवार चुन फेंकना हमारा कौशल है 


निष्क्रिय इंसान खर पतवार के बिछौने पर भूखे पेट सोता है


भाग्य को कोसता है ।



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