शनिवार, 19 जुलाई 2025

भूख और पैसा


 

 

भूख है

 

टैक्स है

 

मंहगाई है

 

मकान की कमी है

 

डिजिटल पेमेंट कौन ले और कौन दे

 

हाथ में सब्ज़ियो के पैसे चाहिए

 

डोसा के पैसे चाहिए

 

समोसे के पैसे चाहिए

 

चाय के पैसे चाहिए

 

पेट्रोल के पैसे चाहिए

 

घर खर्च चलाना है

 

दवा के पैसे चाहिए

 

रिश्ते तो भूल गए

 

मां बाप को भी भूलने लगे है

 

पत्नी तो दूसरे घर की है

 

पति तो दूसरे घर का है

 

अपने बच्चों के लिए जद्दोजहद कर रहे  हम

 

सभ्यता की ओर अग्रसर हो रहे हम

 

जी रहे है हम

 

रीढ़ मजबूत है

 

लड़ रहे समय से हम

 

कमा रहे है

 

पैसे ला रहे है

 

पैसों से घर है

 

पैसों को धूल समझना साहित्य ने सिखाया है

 

पैसों से ही हम है

 

हमारी नस्लें है

 

 

 

 

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