शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

रो लेने दो

 

 

 

 

अपने प्रिय की मौत की ही तरह

 

तोड़ देती है

 

सपनों की मौत भी इंसान को .....

 

बेहतर है

 

उसे रो लेने दो

 

जी भर के ।

 

 

गुरुवार, 24 जुलाई 2025

अपना घर


 

 

 

कैसी होती होगी वो उम्र

 

अजीब होती होंगी वे लड़कियां

 

सपने देखती होंगी जो

 

किसी लड़के का घर

 

सजाने का

 

आंगन में फूल खिलाने का ..........

 

 

आज साठ वर्ष की उम्र में

 

याद कर रही हूं

 

उन स्वप्निल लड़कियों को .......

 

काश

 

लड़कियां अपने मकान का सपना देखतीं ।

 

 

शनिवार, 19 जुलाई 2025

भूख और पैसा


 

 

भूख है

 

टैक्स है

 

मंहगाई है

 

मकान की कमी है

 

डिजिटल पेमेंट कौन ले और कौन दे

 

हाथ में सब्ज़ियो के पैसे चाहिए

 

डोसा के पैसे चाहिए

 

समोसे के पैसे चाहिए

 

चाय के पैसे चाहिए

 

पेट्रोल के पैसे चाहिए

 

घर खर्च चलाना है

 

दवा के पैसे चाहिए

 

रिश्ते तो भूल गए

 

मां बाप को भी भूलने लगे है

 

पत्नी तो दूसरे घर की है

 

पति तो दूसरे घर का है

 

अपने बच्चों के लिए जद्दोजहद कर रहे  हम

 

सभ्यता की ओर अग्रसर हो रहे हम

 

जी रहे है हम

 

रीढ़ मजबूत है

 

लड़ रहे समय से हम

 

कमा रहे है

 

पैसे ला रहे है

 

पैसों से घर है

 

पैसों को धूल समझना साहित्य ने सिखाया है

 

पैसों से ही हम है

 

हमारी नस्लें है

 

 

 

 

कोई भय नहीं

 


 

 

 

 

 पार्क में खदबदाये विचार

 

जा रही हूं शहर से

 

मोह है

 

शहर छूटता जा रहा है........

 

शहर से निकल पा रही हूं

 

जीवित हूं तभी न

 

आगे बढ़ रही हूं

 

कुछ अंतराल पर रुकावटें आ जाती हैं

 

सामने अंधियारा हैं

 

एक दीपक जल रहा है

 

उसी ओर बढ़ना है

 

राह की कंटीली झाड़ियां काटनी है

 

भिड़ना है बनैले पशुओं से

 

झाड़ियां काटनी है

 

बढ़ते जाना है

 

बढ़ते ही जाना है

 

अंतराल आते रहें

 

राह में

 

कोई भय नहीं ।

मकान


 

 

देखती हूं

 

आमदनी कम है

 

पर

 

खूबसूरत मकान है कुछ लॉगों के  पास

 

उनके पूर्वजों के मकान है उनके पास

 

खूबसूरत मकान में रहते हैं वे

 

छत की उन्हें चिंता नहीं

 

आखिर क्यों भटकती  हूं मैं

 

मकान की तलाश  मे

 

कमाते हुए जीव कटा

 

किराए देते देते प्राण सूखते रहे

 

दिन कटते रहे

शनिवार, 12 जुलाई 2025

संध्या

 


 

पुरुष अहंकारी होते हैं

 

संबंध कोई भी हो

 

सत्ता हस्तांतर नहीं करते हैं

 

निकटस्थ महिला को.....

 

यह ज्ञान

 

पुस्तकों से नहीं

 

अनुभव से पाया

 

जीवन संध्या ज्ञात कराई

 

सारा जीवन 


आनंद नहीं प्रयोगशाला रहा

शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

ननद मैके में


 

 

दुकान से चार सेट हार खरीद कर चढ़ा दिये दुल्हन पर

 

दुल्हन घर आई

 

ले लिया पति महोदय ने तीन हार

 

कहा

 

बहन के लॉकर में रख दूंगा

 

ब्याह हुआ घर में

 

दुल्हन का इकलौता हार बिक चुका था

 

ननद ने अपना हार दिया पहनने को अपनी भाभी को

 

भाभी तमकी

 

मेरा हार दो

 

मैं क्यों तुम्हारा हार पहनूं

 

रो दी ननद

 

पिता के सामने

 

कितना बदनाम किया था भाई ने बहन को ।

 ......................



नई दुल्हन आई थी

 

दबे जबान में ससुर कहने लगे

 

ब्याह तय होते समय लड़की ने कहा था

 

घर में ननद है

 

वो ससुराल में नहीं रहेगी ब्याह के बाद ।

क्या कहूं


 

 

कितना भी  बराबरी कर ले पिता

 

अपने बेटे बेटी में

 

उनके बचपन में

 

पर

 

बेटी को विदा कर

 

अपने मकान से बेदखल कर देता है वह 


अपनी बेटी को

 

बेटा ही उसका अपना है

 

बेटी नहीं

 

इसे पितृसत्ता न कहूं तो क्या कहूं

 

बताओ जरा ।

गुरुवार, 3 जुलाई 2025

एक सलाह


 

अब

 

तुम

 

नहीं करोगे अपने मन का

 

अब ज्यादा दूर जाना ठीक नहीं

 

और कितना बिखरोगे  तुम

 

कमजोर हुई हैं

 

पाँखे तुम्हारी

 

मन के जोश से उड़ेगा पंछी

 

तो राह में गिर जाएगा .....

 

अब सुनना है तुम्हें अपने पिता की ...अपनी मां की

 

श्रम करो

 

नीड़ बनाओ

 

पास के पेड़ पर

 

जियो

 

खुश रहो ।