-इंदु बाला सिंह
समय पहाड़ सा डराने लगा
रास्ता रोकने लगा
बिलबिला के वह अंधाधुंध झाड़ियां काटने लगी ...
दृढ़ निश्चय के आगे वनैले पशुओं का भय मिट गया था
....
आखिर खुल गया रास्ता ...
सामने दूर दूर तक हरियाली फैली थी ...
समय मुट्ठी में समा गया ।
रास्ता रोकने लगा
बिलबिला के वह अंधाधुंध झाड़ियां काटने लगी ...
दृढ़ निश्चय के आगे वनैले पशुओं का भय मिट गया था
....
आखिर खुल गया रास्ता ...
सामने दूर दूर तक हरियाली फैली थी ...
समय मुट्ठी में समा गया ।
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