मंगलवार, 20 जून 2017

अब हिसाब कौन लगाये


Friday, March 17, 2017
10:01 AM
-इंदु बाला सिंह

विचित्र जीव है आदमी
यादों के जाल बुनता है ...
वह खींच कर लाना चाहता है अपने बीते पलों को
आज में ...
अपने बनाये मकड़जाल में वह खुद ही फंसता जाता है .....
एक सुबह उसे महसूस होता है
अब उसकी भुजाओं में अब न तो पुरानी ताकत रही
और न ही आंखों में चुम्बकत्व ....
देखते ही देखते काटने लगता है वह अपने इदगिर्द के जाले
बड़ा दुखद होता है उसके लिये
यह  हिसाब लगाना
कि आखिर उसने क्या खोया .. क्या पाया |


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