रविवार, 13 अक्टूबर 2013

समुद्र कूल के किसान

याद आया
सन 1999 में जगह जगह घूमते ग्रामीण
मांगते कपड़े पैसे
दुहाई देते बाढ़ की
हम लोग किसान हैं
सब बह गया बाढ़ में
माँ ! हम भिखारी नहीं हैं |
बस से आ गये थे शहर
बाढ़ग्रस्त गांवो के निवासी भटक रहे थे
जीविका की तलाश में |
इस बार की बाढ़ में भी तो
समंदर ने लील लिया है खेत किसानों के
जो खेत बचे हैं बंजर हैं
क्या खिलाएंगे अपने मालिकों को
शहर में सुरक्षित बैठा मन
है चिंतामग्न !
भूखा किसान हमें क्या खिलायेगा
दूरदर्शन की खबरों से परेशान
दो वर्षीय पुत्री बोल उठी ...
हम मैगी खायेंगे !
दूध नहीं मिलेगा तो
कोल्डड्रिंक पीयेंगे |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें