खाली समय में
डूबकी लगता है
मन
और मुट्ठी में
आये हर कण को
उछाल देता है वह आकाश में
उन्हें
टिमटिमाते देख
प्रसन्न
चित मन और गहरा गोता लगाता है
इस प्रकार
बारम्बार गोताखोरी की प्रक्रिया
असीम चेतना से
तन झंकृत हो उठता है
मन सुखानुभूति
में नहा उठता है
गोताखारी का
आनन्द
गोताखोर ही
जाने |
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