शनिवार, 20 सितंबर 2025

पोटली में टिका इंसान


 

 

पोटली में सिमटे मित्र को कोई लेने न आया

 

परेशान था मन

 

एक दिन मैं भी तो पोटली में  समा जाऊंगा

 

बैंक का अकाउंट तो खाली हो जाएगा

 

पर मै भी पोटली में पड़ा रह जाऊंगा

 

मेरे इस विचार पर 

हंस दी बुद्धि ।

शुक्रवार, 12 सितंबर 2025

बेटी

 

 

 

 

सीख कर बड़ी हुई वह

 

पढ़ लो

 

मुसीबत में काम आयेगा

 

उसने सोचा

 

मुसीबत में काम आने वाले विषय को क्यों पढ़ूं

 

क्या मैं मुसीबत के आने का सपना संजोऊं

 

उसका मन पढ़ाई से उचट गया

 

किस्मत ने खेल खेला

 

मुसीबत आई

 

कम डिग्री में छोटे काम कर के कामना पड़ा उसे

 

अपनी बेटियों को उसने मर्द की तरह कमाने की नसीहत दी

 

बेटियां

 

घर की तलाश में भटकती रहीं 

 

खटती रहीं

 

अपना पेट भरती रहीं

 

घुटती रहीं।

मंगलवार, 2 सितंबर 2025

पत्नी

 

 

पत्नी

 

 

मैं

 

उसकी पत्नी हो कर

 

प्रजा होती तो अच्छा होता

 

कम से कम अपना हक खोने का अफसोस न होता ।

बुधवार, 20 अगस्त 2025

पूरा आकाश मेरा है


 

 

आज बंबई में

 

कॉलोनी की औरतें

 

दिख रहीं हैं शाम से देर रात तक पार्क में

 

छोटे टी शर्ट हों

 

या

 

लॉन्ग कमीज

 

निकर हो

 

या

 

ट्राउजर्स 

 

 शाम के सात बजे हों या रात के ग्यारह बजे हों  

 

 जब समय मिले घुमातीं हैं अपने बच्चे .......

 

 जिनके बच्चे बड़े हो चुके है

 

वे औरतें भी

 

खुद सेहत बनाती है........

 

रात ग्यारह बजे उनकी शाम ही है

 

आत्मविश्वास से भरी ये औरतें

 

जीतीं हैं अपना जीव

 

बच्चियां हों या बड़ी औरतें हों

 

उनका आत्मविश्वास

 

मेरे पंखों को मजबूत करता है

 

मैं भी वाकिंग करती रहती हू

 

उन युवा औरतों को दे

 

मैं भी युवा बन जाती हू

 

 यूं लगता है

 

मैं इस समयमं सत्तर वर्षीया नहीं हू

 

युवा हू

 

आज

 

मै जी रही हूं आजाद जिंदगी

 

मेरा आकाश आधा नहीं

 

पूरा का पूरा मेरा है ।

बेटा तो पिता का है

 

 

 

देख के ब्याहना बिटिया

 

कितना भी सुलझावो बेटे की समस्या

 

बेटा सदा सहानुभूति रखेगा अपने पिता के प्रति

 

भले ही पिताें लाख अवगुण हों

 

वो नहीं दिखेगा उसके बेटे को ......

 

बेटा कभी मां का साथ नहीं देगा

 

बेटे को तो पितानना है एक दिन

 

मां उसके लिये ऐसी सेविका है

 

जो बूढ़ी होने पर बोझन जाती है एक

शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

रो लेने दो

 

 

 

 

अपने प्रिय की मौत की ही तरह

 

तोड़ देती है

 

सपनों की मौत भी इंसान को .....

 

बेहतर है

 

उसे रो लेने दो

 

जी भर के ।

 

 

गुरुवार, 24 जुलाई 2025

अपना घर


 

 

 

कैसी होती होगी वो उम्र

 

अजीब होती होंगी वे लड़कियां

 

सपने देखती होंगी जो

 

किसी लड़के का घर

 

सजाने का

 

आंगन में फूल खिलाने का ..........

 

 

आज साठ वर्ष की उम्र में

 

याद कर रही हूं

 

उन स्वप्निल लड़कियों को .......

 

काश

 

लड़कियां अपने मकान का सपना देखतीं ।