पोटली में सिमटे मित्र को कोई लेने न आया
परेशान था मन
एक दिन मैं भी तो पोटली में समा जाऊंगा
बैंक का अकाउंट तो खाली हो जाएगा
पर मैं भी पोटली में पड़ा रह जाऊंगा
मेरे इस विचार पर
हंस दी बुद्धि ।
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पोटली में सिमटे मित्र को कोई लेने न आया
परेशान था मन
एक दिन मैं भी तो पोटली में समा जाऊंगा
बैंक का अकाउंट तो खाली हो जाएगा
पर मैं भी पोटली में पड़ा रह जाऊंगा
मेरे इस विचार पर
हंस दी बुद्धि ।
सीख कर बड़ी हुई वह
पढ़ लो
मुसीबत में काम आयेगा
उसने सोचा
मुसीबत में काम आने वाले विषय को क्यों पढ़ूं
क्या मैं मुसीबत के आने का सपना संजोऊं
उसका मन पढ़ाई से उचट गया
किस्मत ने खेल खेला
मुसीबत आई
कम डिग्री में छोटे काम कर के कामना पड़ा उसे
अपनी बेटियों को उसने मर्द की तरह कमाने की नसीहत दी
बेटियां
घर की तलाश में भटकती रहीं
खटती रहीं
अपना पेट भरती रहीं
घुटती रहीं।
आज बंबई में
कॉलोनी की औरतें
दिख रहीं हैं शाम से देर रात तक पार्क में
छोटे टी शर्ट हों
या
लॉन्ग कमीज
निकर हो
या
ट्राउजर्स
शाम के सात बजे हों या रात के ग्यारह बजे हों
जब समय मिले घुमातीं हैं अपने बच्चे .......
जिनके बच्चे बड़े हो चुके हैं
वे औरतें भी
खुद सेहत बनाती हैं ........
रात ग्यारह बजे उनकी शाम ही है
आत्मविश्वास से भरी ये औरतें
जीतीं हैं अपना जीवन
बच्चियां हों या बड़ी औरतें हों
उनका आत्मविश्वास
मेरे पंखों को मजबूत करता है
मैं भी वाकिंग करती रहती हूं
उन युवा औरतों को देख
मैं भी युवा बन जाती हूं
यूं लगता है
मैं इस समय ैमं सत्तर वर्षीया नहीं हूं
युवा हूं
आज
मैं जी रही हूं आजाद जिंदगी
मेरा आकाश आधा नहीं
पूरा का पूरा मेरा है ।
देख के ब्याहना बिटिया
कितना भी सुलझावो बेटे की समस्या
बेटा सदा सहानुभूति रखेगा अपने पिता के प्रति
भले ही पिता में लाख अवगुण हों
वो नहीं दिखेगा उसके बेटे को ......
बेटा कभी मां का साथ नहीं देगा
बेटे को तो पिता बनना है एक दिन
मां उसके लिये ऐसी सेविका है
जो बूढ़ी होने पर बोझ बन जाती है एक ।
अपने प्रिय की मौत की ही तरह
तोड़ देती है
सपनों की मौत भी इंसान को .....
बेहतर है
उसे रो लेने दो
जी भर के ।
कैसी होती होगी वो उम्र
अजीब होती होंगी वे लड़कियां
सपने देखती होंगी जो
किसी लड़के का घर
सजाने का
आंगन में फूल खिलाने का ..........
आज साठ वर्ष की उम्र में
याद कर रही हूं
उन स्वप्निल लड़कियों को .......
काश
लड़कियां अपने मकान का सपना देखतीं ।