वसीयत में
मिली तूफानी रातें
सम्हाली है
मैंने
हर
सुबह चुस्त कर देती हैं ये मुझे
तेरे डुबोने
की मंशा मुझे
न होगी पूरी
जान ले
लाख कर उपाय
बिजली की
औलाद हूँ
अपनी मौत मर
जाओगे एक दिन
हो के परेशान
एक दिन |My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.