रविवार, 11 जून 2017

कब्जा


-इंदु बाला सिंह
हथेली के नीचे जब तक दबा था ...मेरा था
सब कुछ मेरा था
पसीना पोंछने के लिये हथेली ऊपर की मैंने
सहोदर ने कब्जा कर लिया ।

तीरंदाज


Wednesday, June 7, 2017
8:21 AM
-इंदु बाला सिंह
पिता ने अपने बेटे और अकेली बेटी को हकदार बनाया ...
अपने मकान का
पिता के गुजरने के बाद भाई ने बहन की उपस्थिति के प्रति मौन अस्वीकृति जताई
और मुहल्ले में खूब नाम कमाया उसने ....
आखिर रखा है उसने
अपनी बहन को घर में
कुछ तीर दिखते नहीं पर चुभते हैं ।

गजब का जीवन


Monday, June 5, 2017
7:46 AM
- इंदु बाला सिंह
किया क्या मैंने
आजीवन ...चलती रही उम्मीद की उंगली थामे
भटकती रही वन में
खुद को छलती रही...
सोंचती रही ..नई राह बना रही हूं....
गजब का जीवन जिया मैंने ।

सच और झूठ


Sunday, January 29, 2017
1:05 PM
- इंदु बाला सिंह
कभी कभी हम जो देखते हैं
वह झूठ होता है
और हम जो सुनते हैं
वह भी झूठ होता है
बेहतर है
हम अपनी वैचारिक क्षमता दुरुस्त रखें ।

गजब का योद्धा


Saturday, June 3, 2017
10:04 AM
- इंदु बाला सिंह
आंसू का आंखों में सूखना
किस्मत की लाल आंखों से मुंह फेरना
हिम्मत बुलन्द रखना
जीवन संग्राम के योद्धा की पहली पहचान है
और
ऐसा ....गजब का योद्धा ....सदा अकेला रहता है .. अपने रणक्षेत्र में ।

समय चला गया


समय को बांधा औरत ने अपने बच्चों में 
हाथ पांव के मजबूत होते ही ... वे चले गये
काश बांधी होती वह अपना कुछ समय ...अपने मित्रों में
तो उसे वापस मिल पाता अपना समय ।

आखिर क्यों



- इंदु बाला सिंह
टूटते सितारे से लोग मांगते है ....अपनी चाहत 
मैं .... उस सितारे के टूटने से दुखी होती हूं
गुजरते मुर्दे को लोग नमस्कार करते हैं
पर ....मुझे उस निर्जीव का दुखी परिवार याद आता है
आखिर क्यों ।