My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
नदी के इस पार खड़ी हूं
जला दिया है लौटने का पुल खुद मैने
निहारूं मैं पुराना भग्नावशेष
जितना भी दौड़ूँ
आगे न बढ़ पाउं
यह कैसा मोह है पुरातन का
बढ़ने न दे आगे
बदबू भी न महसूस कर पाऊं
संबंधों के सड़ेपन की ।
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