Indu Bala Singh
अल्ट्रासाऊंड से पता चला
दुःख है गर्भ में .......
डाक़्टर ने समझाया - गिरा दो गर्भ ...
संतान तो प्यारी होती है
और वह भी पहली संतान !
कभी नहीं मुक्त होउंगी अपने अंश से .........
आज सबने छोड़ा साथ मेरा ......
दुख ...... मेरी कलम में स्याही सा चढ़ ....... रंग रहा है सफेद कागज .....
न जाने क्यों आ खड़ी हो गयी हैं मेरे इर्द गिर्द ........ न जाने कितनी मौन छायायें |
अल्ट्रासाऊंड से पता चला
दुःख है गर्भ में .......
डाक़्टर ने समझाया - गिरा दो गर्भ ...
संतान तो प्यारी होती है
और वह भी पहली संतान !
कभी नहीं मुक्त होउंगी अपने अंश से .........
आज सबने छोड़ा साथ मेरा ......
दुख ...... मेरी कलम में स्याही सा चढ़ ....... रंग रहा है सफेद कागज .....
न जाने क्यों आ खड़ी हो गयी हैं मेरे इर्द गिर्द ........ न जाने कितनी मौन छायायें |
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