-इंदु बाला सिंह
कैसे हैं हम
कैसा है हमारा दिल
चारों ओर मचा है पानी के लिये हाहाकार
हमारे घरों में नल से बह रहा है ढेर सारा पानी
हम अपनी गाड़ियां नहला रहे हैं
घर सामने लगाये हैं सीमेंट का का हौदा ........ भरा रहता है सदा पानी से .......
सड़क से गुजरने वाले कुत्ते पानी रहे हैं .... गायें पानी रही हैं ........
हम पूण्य कमा रहे हैं ......
और
हमारे रिश्तेदार मर रहे हैं सूखे से गांव में ....
अरे !
मैंने गोद लिया है न एक गांव.......
मेरी की कामवाली ..... मेरे आफिस के कर्मचारी ......... फैकट्री के कर्मचारी सब को प्रोविडेंट फंड हकदार बनाया है मैंने .......
मैं अपने निकटस्थ का शुभचिंतक हूं .........
मैं पानीदार हूं ।
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