अपने अंतिम समय में तानाशाह मार दिया जाता है
या
अकेला रह जाता है
अपने मन और तन के बोझ के साथ ।
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अपने अंतिम समय में तानाशाह मार दिया जाता है
या
अकेला रह जाता है
अपने मन और तन के बोझ के साथ ।
वह होश सम्हालते ही भाई को गोद में लेने लगी
माँ खाना बनाती थी
जब बड़ी हुई तो वह खाना बनाने लगी
ब्याह हुआ
तो ससुराल में खाना बनाने लगी
बेटा बड़ा हुआ
तो बेटे के घर में खाना बनाने लगी
और
वह खुश है
वह निकम्मी नहीं है ।
यूँ ही नहीं कहानियाँ नहीं है कही जातीं हैं कहानी
कंस मामा की
आज भी है कंस मामा
छूने नहीं देता बहन के परिवार को पैतृक संपत्ति
कुटिल हो कहता है
नहीं मिलती बेटी को संपत्ति
समाज के आँख पर पट्टी बँधी है
तृप्त होता है आज भी कंस मामा
बहन के मौत पर
तेरही पर भी नहीं जाता
अच्छा हुआ हक़दार ने आँखें मूँदी ।
पैतृक संपत्ति ने बांध के रखा था
भाई बहन को
मकान की मरम्मत जरूरी थी
बहन ने हक त्यागा
उसे एक साड़ी और मिठाई मिली लौटते वक्त
उम्र बढ़ गई थी बहन की
साड़ी बाँधना मुश्किल था
डाइबिटीज से पीड़ित बहन ने अपनी मिठाई और साड़ी कामवाली को दे दी
हक खत्म हुआ
रिश्ते बिखर गये ।
#इन्दु_बाला_सिंह
बेटी ने अपनी असफलता का ठीकरा माँ पर फोड़ा
बेटे ने अपनी पारिवारिक वैमन्ष्य का जिम्मेवार माँ को बताया
माँ हाउस वाइफ ही रही
होम मेकर न कहला पाई
पति के लिये पत्नी बच्चे पैदा करनेवाली और कामवाली थी
आख़िर कितना ज़िम्मा उठाना पड़ता था पति को
अब गाँव नहीं कि घर के काम ज़्यादा थे
शहर में रहती थी माँ
सुविधाभोगी कहलायी सदा
ख़ुद लड़ झगड़ के कमाने न निकल पड़ी
पति के गुज़रने पर माँ अकेली हो गई
और
माँ के गुज़रने पर बेटा
बेटी तो ब्याहता थी
आबाद रही
पर
वह भी कमाऊ न बनी
दुःख की लड़ी न काटी बेटी ने भी ।
#इन्दु_बाला_सिंह
लड़की
बचपन में पिता के दान पर पली
बड़ी हुई तो बोझ बनी
दान की गयी
पर पुरुष को
अब यहाँ अहसान और दान का खा रही थी वह
वृद्धावस्था में बेटा के दान का खाने लगी .…
बेटी खुद दान का खा रही थी
वह दान देने के काबिल ही नहीं थी
लड़कियाँ फ़क़ीर होतीं हैं
भटकती रहतीं हैं
अन्न के लिये ।