शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

जिंदगी

- इंदु बाला सिंह


जिंदगी ...एक बुलबुला है पानी का

सूरज की रोशनी में सतरंगी बन जाता है

सीपी में प्रवेश करते ही मोती बन जाता है ।

शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

छेड़ो न दीपक को

- इंदु बाला सिंह


जलने दो दीपक को

थोड़ा सा ही तो स्नेह है

खुद बुझ जायेगी वह आशा - लौ ...

तुम्हें उस दीपक से दिशा-ज्ञान नहीं चाहिये न सही

हो सकता है किसी भटके पथिक का वह  पथ प्रदर्शक बन जाये

छेड़ो न तुम लौ को .... दिख जायेगा तुम्हारा चेहरा हर किसी को ।


शनिवार, 17 नवंबर 2018

घर

- इंदु बाला सिंह

घर के लिये मकान जरूरी है

पर मकान के लिये  घर जरूरी नहीं .....

गजब है न ! लोग मकान में रहते हैं

पर वह घर सरीखा दिखता भर है ....

एक विचारणीय शब्द है घर

कभी समय मिले तो सोंचना तुम घर का अर्थ....

तुम घर में रहने की चेष्टा करना ।

मंगलवार, 13 नवंबर 2018

बेटियां खुद आत्मनिर्भर हो जायेंगीं

- इंदु बाला सिंह

आजीवन युद्ध चलता रहा उसका समय से

पर जीतते गये उसके अपने , रिश्तेदार ..

कौन कहता है बेटे और बेटी में फर्क नहीं है

अखबार तो बस अखबार ही है .....

घून लगा है परिवार में

लड़की की जड़ें खोखली हैं ...बाकी सब दिखावा है

जैसे देश आजाद हुआ था

एक न एक दिन खुद बखुद आजाद हो जायेंगीं

बेटियां ...


आत्मनिर्भर हो जायेंगी .... एक दिन बेटियां ।

शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

नन्ही

-इंदु बाला सिंह

बेटी उतरी धरती पर

जन्मी खुशी ....

संग लाई वह .... एक अनजाना भय

न जाने कैसा होगा भविष्य ...

पिता उसके .....सुरक्षा कवच थे ...छांव थे

समय उसे ललकारता रहा ...

भय के क्रूर धरातल पर चलते रहे

 उसके फौलादी  पांव ....

अपने ... उसके गिरने के  इंतजार में रहे  ।



गुरुवार, 1 नवंबर 2018

आह...की आग

- इंदु बाला सिंह

दिल न दुखाना किसीका

क्या पता कब लग जाय  ...आह किसी की ।

क्रोध तो  विष है  ...धारण कर ले न .... तू  आज ..... उसे  निज  कण्ठ में

क्या पता कब .. नीला कर  दे ...वह तेरा  तन ।