मंगलवार, 3 अप्रैल 2018

मधुशाला


-इन्दु बाला सिंह


माना भेद मिटाये तेरी हाला
ओ री मधुशाला !
पर कितने घर तोड़े तूने ...... तू क्या जाने
ज्यों ज्यों रात गहराये
तू इठलाये ... मेरा जी जलाये ।

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