रविवार, 19 फ़रवरी 2017

तराश प्रतिभा की


Monday, February 20, 2017
7:46 AM
-इंदु बाला सिंह


डायरी में लिखी गयी
पिता के नाम की चिट्ठियां
डाली नहीं गयीं कभी डाकखाने में ....
भला ...कौन डालता उसकी चिट्ठियां  ....
चिट्ठी तब तक लिखी गयी ... जब तक आशायें जिन्दा रहीं
बाकी पन्ने कोरे रह गये ......

लड़की तराशी जा रही थी .... बड़े परिवारवाले अभावग्रस्त घर में |

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

आनेवाला पल


- इंदु बाला सिंह
समय चीनी है 
चींटी सा बन .... उठा हर दाना
लगे रह अपने स्वप्न पथ पर
तेरा आज ही है आनेवाले कल की नींव
ओ रे मन !
बस चलता रह
रुकना न तू ......एक भी पल ।

खूंटा


Friday, February 03, 2017
1:55 PM
- इंदु बाला सिंह
खूंटे से बंधा अस्तित्व
खूंटा जर्जर हो के गिर जाने पर भी बंधा रहता है
और
वह सतत एक काल्पनिक परिधि में घूमता रहता है .....
यह मोह है या आदत !

सुबह की आशा


Monday, January 30, 2017
4:19 AM
बह रहा है समय
मौन मुखरित न हो रहा
 यूँ लग रहा घरों में आत्मायें डोल रहीं हों
एक एक पल भारी होने लग रहा है सूरज के इन्तजार में |

ब्याहता के पुराने दिन


06 January 2017
10:11
मुझे ऐसी बहू चाहिये ....
जो घर का काम करे .....
सास ससुर का ख्याल रखे .....
ननदों को अपना समझे ...
और मुझे उस ब्याहता के पुराने दिन याद आ गये |

आदर्श बनना चाहते रहे हम


- इंदु बाला सिंह

गिर गिर के चले हम 
आंधियो से सहमते रहे हम
न जाने किस आस में जीते रहे हम
आखिर क्यों और न जाने किसका आदर्श बनना चाहते रहे हम ।

पर्दा सी रहे हैं हम


- इंदु बाला सिंह
हम तो तब भी कसक रहे थे .... अब भी कसक रहे हैं 
मर्यादा ढो रहे हैं
किवाड़ के फटे पर्दे सी रहे हैं
वरना हम भी आदमी थे काम के ।

लड़की घोड़े पर सवार नहीं हुयी


Wednesday, February 15, 2017
7:45 PM


राजकुमार घोड़े पे आयेगा ....
राजमहल ले जायेगा .....
कहानियां सुन बड़ी हुयी ....लड़की
न जान पायी .....
जुझारुपन |
उसने .... बनाया  एक सूरज....नामकरण किया उसका ...किस्मत
और
वह सदा बातें करने लगी

अपनी  किस्मत से |