सोमवार, 27 मई 2019

यशस्वी भव


- इंदु बाला सिंह


कभी किसी अपने के डहुरने का कारण न बनना

बीता पल लौट के न आता

घाव कभी न भरता

रुपया कुछ है पर सब कुछ नहीं

भागमभाग में उतर जाता है नशा ....

आखों के आगे

बस

सूना आकाश रह जाता है ....

बंजर जमीन रह जाती है ...

यश न कमाया तो क्या कमाया ।

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