गुरुवार, 19 जनवरी 2012

गरीब

        

नैतिकता का पाठ 
विद्यालय में लगता है अच्छा
अभावग्रस्त घर में नहीं ।
छोटे छोटे झूठों के सहारे 
मुस्कराते भरे पूरे सफल रिश्ते 
खुशहाल घर 
चिढाते हैं मुंह।
कहाँ से हम करप्सन 
करेंगे दूर ।
जिसने दी रोटी 
उसी के हो लिए ।
इलाज तो है अमीरों की बपौती 
सपना भी देखते नहीं ।
हम स्त्री पुरुष मजदूर हैं 
हम सड़क दुर्घटना में मरते हैं 
या जीवनसंध्या में 
घरों के सामने घरों के सामने हो जाते हैं खड़े 
मिली भीख के बदले 
देते हैं आशीष ।

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