नैतिकता का पाठ
विद्यालय में लगता है अच्छा
अभावग्रस्त घर में नहीं ।
छोटे छोटे झूठों के सहारे
मुस्कराते भरे पूरे सफल रिश्ते
खुशहाल घर
चिढाते हैं मुंह।
कहाँ से हम करप्सन
करेंगे दूर ।
जिसने दी रोटी
उसी के हो लिए ।
इलाज तो है अमीरों की बपौती
सपना भी देखते नहीं ।
हम स्त्री पुरुष मजदूर हैं
हम सड़क दुर्घटना में मरते हैं
या जीवनसंध्या में
घरों के सामने घरों के सामने हो जाते हैं खड़े
मिली भीख के बदले
देते हैं आशीष ।
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