वह औरत एक गृहणी थी
है भी
कह सकते हैं ।
पति के साथ
जीवन कटा
घर या कहिये मकान बना ।
अब वह तैयार नहीं
बेटे की कमाऊ पत्नी का घर
बच्चे सम्हालने को ।
जीवनसंध्या में
जिम्मेदारी !
कभी नहीं ।
पति रह लें
सम्हालें बेटे के बच्चे
अब और नहीं ।
अपना घर ,मकान
अपना मान
अपना जीवन है ।
जी रही है वो
स्वाभिमानिनी
लोगों की ईर्ष्या की पात्र ।
आजादी सुरक्षित रखना
एक मनोबल
एक अहसास है ।