शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

बेहया


परिस्थितियों की आंधी में

मैं फौलाद बनना चाही

पिता जैसा मजबूत बनना चाही

दयालु और दृढ़ निश्चयी बनना चाही

मेहनतकश बनना चाही

दिन बीतते गये

मैने माँ की तरह बच्चे पैदा किये

बच्चे बड़े हुए

और

औरत ही बनी रही

न तो माँ बन सकी और न ही पिता

बस

बेहया का पौधा बन गई ।

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