परिस्थितियों की आंधी में
मैं फौलाद बनना चाही
पिता जैसा मजबूत बनना चाही
दयालु और दृढ़ निश्चयी बनना चाही
मेहनतकश बनना चाही
दिन बीतते गये
मैने माँ की तरह बच्चे पैदा किये
बच्चे बड़े हुए
और
औरत ही बनी रही
न तो माँ बन सकी और न ही पिता
बस
बेहया का पौधा बन गई ।
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