दुखेगा दिल तो फुंफकार उठेंगे
पिता ...
सोये हैं वे
बेटी के दिल में ।
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
एपिस्टिन फाइल खुल रही थी
ईश्वर गायब था
बच्चियां मर रहीं थीं
पका कर खाई जा रहीं थी
अबोध लड़कियां गायब हो रहीं थीं
किसी अखबार ने खबर छापा था
एक बलात्कार की भुक्तभोगी ने लिखी थी आत्मकथा
माहौल में सनसनी थी
सोया मुद्दा गरमाया
बालिका संरक्षण गृह क्यों बनता है
घर में अपनों के पास बालिकाऐं सुरक्षित नहीं हैं क्या ।
संतान का पैर आपके जूते में सामने लायक हो जायेगा एक दिन
याद रखें
अपरिचित हो जाएंगे वे आपके लिये
मोहमुक्त रहना सुख देता
आपकी छाया नहीं धन चाहिए
उन्हें
नया विश्रामागार भाये
इतिहास की राजनीति करते वे ।