सोमवार, 24 नवंबर 2025

ब्याहता का दुःख


 

तीन बेटियों और दो बेटों की मां

 

मर्दिकम्मा

 

अपना दुःख बोलते बोलतेस कामवाली की आँखें भींज गईं

 

गांव में घर है खेत है भाई अनाज खाता है

 

मुझे नहीं देता.........

 

चेतना दुख देती है ।

बुधवार, 19 नवंबर 2025

आवाजें



रह जाती हैं आवाजें 

इंसान के गुजरने के बाद 

वे 

हमें आजीवन सुनाई देतीं हैं.....


जब जब हम अकेले होते हैं।