तीन बेटियों और दो बेटों की मां
मर्द निकम्मा
अपना दुःख बोलते बोलते उस कामवाली की आँखें भींज गईं
गांव में घर है खेत है भाई अनाज खाता है
मुझे नहीं देता.........
चेतना दुख देती है ।
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
तीन बेटियों और दो बेटों की मां
मर्द निकम्मा
अपना दुःख बोलते बोलते उस कामवाली की आँखें भींज गईं
गांव में घर है खेत है भाई अनाज खाता है
मुझे नहीं देता.........
चेतना दुख देती है ।